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कौशाम्बी ब्यूरो। विकासखंड सिराथू की ग्राम पंचायत मानपुर गौरा के पंचायत सहायक आशीष सिंह के वायरल वीडियो ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौशाम्बी ब्यूरो। विकासखंड सिराथू की ग्राम पंचायत मानपुर गौरा के पंचायत सहायक आशीष सिंह के वायरल वीडियो ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत सहायक ने अपने वीडियो में गांव से लिए गए चंदे की रकम के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मानपुर गौरा से लिया गया पैसा आखिर कहां गया। इसी वीडियो में उसने ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में 40 से 50 प्रतिशत कमीशन दिए जाने का आरोप लगाया है और जिला पंचायती राज अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो में कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।पंचायत सहायक ने जिला पंचायती राज अधिकारी पर प्लॉट लेने और बंगला बनवाने तक के आरोप लगाए हैं। उसने पंचायती राज अधिकारी पर शोषण किए जाने की बात कहते हुए ग्राम पंचायत के विकास धन के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद अब केवल बयानबाजी से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए, बल्कि संबंधित अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए।जिला पंचायती राज अधिकारी की संपत्ति, भूमि और बंगले से संबंधित अभिलेखों की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए। बंगला कब और कितनी लगत से बना, भूमि कहां-कहां दर्ज है, संपत्तियों की खरीद के लिए धन का स्रोत क्या रहा और संबंधित अधिकारी की घोषित आय एवं संपत्ति के अभिलेख क्या कहते हैं, इसकी जांच की जानी चाहिए। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।सबसे गंभीर आरोप ग्राम पंचायत के विकास धन से 40 से 50 प्रतिशत कमीशन लिए जाने का है। इसकी भी अभिलेखीय जांच की जानी चाहिए। ग्राम पंचायत को प्राप्त धनराशि, स्वीकृत विकास कार्य, कार्यों पर हुआ भुगतान, संबंधित बिल-वाउचर, भुगतान की प्रक्रिया और मौके पर कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत के अभिलेखों और वास्तविक विकास कार्यों का मिलान होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।पंचायत सहायक ने अपने वीडियो में जिला पंचायती राज अधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्रों का भी उल्लेख किया है। उसने सवाल उठाया है कि उसके प्रार्थना पत्रों पर क्या कार्रवाई हुई और क्या संबंधित उच्च अधिकारियों को उसका जवाब भेजा गया। यदि प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया गया है तो उससे संबंधित अभिलेख और कार्रवाई की रिपोर्ट भी सामने रखी जानी चाहिए। शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराना भी पारदर्शी प्रशासन का हिस्सा है।वायरल वीडियो में पंचायत सहायक ने कार्रवाई नहीं होने पर मुहिम चलाने की बात भी कही है। अब यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वह किस मुहिम की बात कर रहा है और उसके पास अपने आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद हैं। जांच अधिकारी को उसके बयान दर्ज कराकर उपलब्ध साक्ष्यों को अभिलेखों के साथ मिलान करना चाहिए।मामला किसी व्यक्ति विशेष के आरोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए जारी सरकारी धन से जुड़ा प्रत्येक आरोप सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है। इसलिए जनपद के उच्च अधिकारियों द्वारा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई और आरोप गलत पाए जाएं तो इसकी स्पष्ट रिपोर्ट सामने आनी चाहिए।वायरल वीडियो में उठाए गए सवालों का जवाब जांच और दस्तावेजों से ही मिल सकता है। सरकारी धन, ग्राम पंचायत के विकास कार्य और अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही से जुड़े इतने गंभीर आरोपों को अनदेखा करना उचित नहीं है। अब निगाह इस बात पर है कि उच्च अधिकारी मामले को गंभीरता से लेकर जांच की कार्रवाई कब शुरू कराते हैं।

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